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भारत-बेल्जियम की बढ़ी डिफेंस पार्टनरशिप, अंडरवाटर रोबोट से Zorawar टैंक तक मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली

सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्‍तार में बताते हैं। 

कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा?

1. जोरावर टैंक का ‘हेड’ (John Cockerill 3105 Turret)

सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा। 

• पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा। 

2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket)
• सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा.
• पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बनने लगेगा। 

3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper)
• सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स.
• पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा। 

4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachaussée):
• सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली.
• पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा। 

 

वेपन / टेकपार्टनर कंपनीक्या है खास बात?असली काम कहाँ आएगा?
3105 टैंक टरेटJohn Cockerill105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेटजोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती)
70mm लेजर रॉकेटThales Belgiumस्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंजप्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए
अंडरवाटर रोबोट्सExail Robotics300m गहराई में माइन्स ढूंढेगाइंडियन नेवी के जहाजों हेतु
एम्युनिशन फैक्ट्रीNew Lachaussée10 करोड़ राउंड्स/सालआर्मी के लिए गोलियों का बैकअप

बॉटम लाइन
1. नो मोर इंपोर्ट: भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा.

2. चीन-पाक हैरान: पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं.

3. फ्यूचर एक्सपोर्ट: आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा.

सवाल-जवाब

1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है?

10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है.

2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है?

बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल ‘टरेट’ (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा.

3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं?

अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है.

4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है?

नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे.

5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है?

हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.

 

 

 

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