मध्य प्रदेश में बेसमेंट के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक, रेस्टोरेंट से हॉस्टल तक नहीं बना सकेंगे

इंदौर
मध्य प्रदेश में बड़ी इमारतों में फायर सेफ्टी रूल्स को लेकर बड़ी सख्ती की गई है। मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा नियम-2026 में अब नियमों को तोड़ने पर एफआईआर के साथ बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है। अब इमारतों में जांच के बाद कमियों को दूर करने के लिए केवल 30 दिन का ही समय दिया जाएगा। नए नियमों के तहत अधिकारियों की ओर से होने वाली कोई भी ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमियां दूर न करने पर इमारत या भवन को असुरक्षित घोषित कर सील कर दिया जाएगा। इसके बाद भी अगर कोई सील तोड़कर बिना किसी एनओसी के फिर से इमारत में अपना काम जारी रखता है तो उसके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं ऐसे मामले में बड़ा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बेसमेंट में किचन और बैटरी रखने पर भी पांबदी
नए नियमों के तहत इमारतों के बेसमेंट में किसी भी तरह के व्यावासायिक गतिविधि पर पूरी तरह से रोक लगाई गई। यहां किचन, रेस्टोरेंट, रूम, हॉस्टल नहीं बनेंगे। इसके साथ ही बेसमेंट में ज्वलनशील पदार्थ और बैटरी और यूपीएस भी नहीं रखा जा सकेगा। अधिकारी समय-समय पर इसको लेकर इमारतों की जांच करेंगे। अगर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो तुरंत कार्रवाई होगी।
पेट्रोल-डीजल और ईवी के लिए सेंसर
बेसमेंट में ईलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जिंग और पार्किंग के लिए रेट ऑफ राइज हीट सेंसर लगाना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही जहां बेसमेंट में पेट्रोल-डीजल वाहन पार्क होते हैं वहां कार्बन मोनोऑक्साइड सेंसर लगाना होगा। इससे धुआं उठने या जहरीली गैस बेसमेंट में होने की स्थिति में सेंसर तुरंत अलट करेगा।
आम लोगों के लिए फायर सेफ्टी नियमों की 8 जरूरी बातें
1. घर और फ्लैट के लिए क्या नियम हैं?
आवासीय भवनों पर भी फायर सेफ्टी नियम लागू होंगे। 24 मीटर से अधिक ऊंचाई या प्रति फ्लोर 750 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले भवनों को फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र लेना होगा।
निर्धारित दोनों सीमाओं के भीतर आने वाले भवनों को प्रमाण पत्र से छूट दी गई है। पुराने प्रमाणपत्र वाले भवनों के लिए अलग प्रावधान हैं।
2. दुकानों, बाजारों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा जरूरी
दुकानों, मॉल, होटलों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक परिसरों में भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार फायर सेफ्टी इंतजाम करने होंगे।
इनमें फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, पानी की उपलब्धता और आपातकालीन निकास शामिल हो सकते हैं।
3. अस्पतालों और स्कूलों में भी सुरक्षा मानक जरूरी
अस्पतालों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक भवनों को अपनी श्रेणी के अनुसार फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य आग लगने पर मरीजों, बच्चों, कर्मचारियों और आम लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
4. फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र कितने समय तक वैध रहेगा?
नियमों के अनुसार, फायर सेफ्टी प्रमाण पत्र सामान्यतः पांच साल और फायर प्लान की मंजूरी तीन साल तक वैध रहेगी। प्रमाण पत्र के नवीनीकरण के लिए उसकी वैधता समाप्त होने से कम से कम 60 दिन पहले आवेदन करना होगा।
5. हर साल फायर सेफ्टी ऑडिट जरूरी
भवन मालिक या संचालक को हर वित्तीय वर्ष 30 जून तक फायर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी। उसे सुरक्षा इंतजाम चालू रखने और सालाना घोषणा देने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
6. सुरक्षा में कमी मिली तो 30 दिन में सुधार करना होगा
निरीक्षण में फायर सेफ्टी की कमियां मिलने पर सक्षम प्राधिकारी भवन मालिक या संचालक को नोटिस दे सकता है। सामान्य प्रक्रिया में कमियां दूर करने के लिए अधिकतम 30 दिन मिल सकते हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित कर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
7. शादी, धार्मिक आयोजनों और पंडालों पर भी नियम लागू
अस्थायी पंडाल, टेंट, मंडप और सार्वजनिक आयोजनों में निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना होगा। आयोजक को कार्यक्रम से कम से कम 48 घंटे पहले सुरक्षा संबंधी घोषणा और तय लेआउट जमा करना होगा। गंभीर खामी मिलने पर अस्थायी ढांचे को असुरक्षित घोषित कर सील किया जा सकता है।
8. फायर टैक्स और सेवा शुल्क कितना लगेगा?
नियमों में संपत्ति कर के कम से कम 2% की दर से फायर टैक्स लगाने का प्रावधान है। इसकी दर राज्य सरकार तय कर सकती है, लेकिन आवासीय संपत्तियों को फायर टैक्स से छूट दी गई है।
कुछ फायर सेवाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी संगठनों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी निर्धारित परिस्थितियों में सेवा शुल्क से छूट मिलेगी।।
1. हर इमारत के लिए अलग फायर सेफ्टी मानक
नियमों में भवनों को उपयोग के आधार पर आवासीय, शैक्षणिक, संस्थागत, असेंबली, व्यावसायिक, बाजार, औद्योगिक, भंडारण और खतरनाक गतिविधियों वाली श्रेणियों में बांटा गया है। अग्निशमन उपकरणों की संख्या, निकास द्वार और सुरक्षा इंतजाम भवन की श्रेणी, ऊंचाई और क्षेत्रफल के अनुसार तय होंगे।
2. फायर सेफ्टी की जिम्मेदारी भवन मालिक की
भवन मालिक या संचालक को फायर सेफ्टी इंतजाम चालू हालत में रखने होंगे। सालाना घोषणा में इनकी स्थिति की पुष्टि करनी होगी। निरीक्षण के दौरान अधिकारी कमियों की रिपोर्ट तैयार कर साक्ष्य दर्ज कर सकते हैं और सुधार के निर्देश दे सकते हैं।
नोटिस के बाद भी कमियां दूर नहीं करने पर भवन को असुरक्षित घोषित किया जा सकता है। गंभीर मामलों में उसे सील करने या बिजली-पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश भी दिए जा सकते हैं।
3. आग लगने पर दमकल, पुलिस और चिकित्सा सेवाओं में समन्वय
नियमों के तहत फायर कंट्रोल रूम, दमकल, पुलिस, चिकित्सा सेवाओं और स्थानीय निकायों के बीच समन्वय किया जाएगा। आग की सूचना मिलने पर घटनास्थल, फंसे लोगों और संभावित नुकसान का ब्योरा दर्ज होगा।
जरूरत के अनुसार बिजली बंद कराने, एंबुलेंस बुलाने, भीड़ हटाने और मलबा हटाने में संबंधित विभागों की मदद ली जा सकेगी। दमकल अधिकारी दूसरे फायर स्टेशनों से भी कर्मचारी और उपकरण बुला सकेंगे। आपात स्थिति में सरकारी विभागों और निजी संस्थाओं के संसाधनों का भी उपयोग किया जा सकेगा।
4. फायर सेफ्टी के काम के लिए एजेंसी को लाइसेंस जरूरी
फायर सेफ्टी का काम करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए संबंधित तकनीकी क्षेत्र में योग्यता और कम से कम तीन साल का अनुभव जरूरी है। आवेदन शुल्क ₹10,000 है और लाइसेंस पांच साल तक वैध रहेगा।
एजेंसियों को निर्धारित मानकों के अनुसार काम करने, उपकरणों की जांच व रखरखाव करने, दस्तावेज सुरक्षित रखने और काम पूरा होने का प्रमाणपत्र देने की जिम्मेदारी निभानी होगी। लापरवाही या नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है।



