उत्तर प्रदेशराज्य

लखनऊ में CHO का प्रदर्शन जारी, अब ANM के जिम्मे होगी ब्लड प्रेशर और डायबिटीज की जांच

 लखनऊ
 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) की हड़ताल या पद रिक्त होने की स्थिति में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखने की जिम्मेदारी अब सहायक नर्सिंग मिडवाइफ (एएनएम) संभालेंगी।

वे अपनी नियमित जिम्मेदारियों के साथ इन केंद्रों पर रक्तचाप, मधुमेह, शिशु स्वास्थ्य और आकस्मिक चिकित्सा से जुड़ी निर्धारित सेवाएं भी देंगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक पिंकी जोयाल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।

राज्य में 29 हजार आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं, जहां 17 हजार से अधिक सीएचओ तैनात हैं। सीएचओ 27 सितंबर से लखनऊ के इको गार्डन में धरना दे रहे हैं। वे प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन राशि (पीबीआई) को वेतन के साथ जोड़कर भुगतान करने और वेतन ग्रेड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

हड़ताल के कारण इन केंद्रों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसे देखते हुए एनएचएम ने निर्देश दिया है कि सीएचओ की गैरहाजिरी या पद रिक्त होने पर संबंधित केंद्र की निर्धारित सेवाओं का काम एएनएम संभालेंगी। वे अपना नियमित कार्य भी जारी रखेंगी।

सीएचओ संघ के प्रदेश अध्यक्ष सनत सिंह ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सीएचओ की तैनाती से पहले किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर जैसी बीमारियों की स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी मिलती है।

उनके अनुसार, सीएचओ को निर्धारित 84 दवाओं के वितरण का अधिकार भी है, जबकि एएनएम को इन कार्यों का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला है। स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े पोर्टल पर दर्ज करने का अनुभव भी उनके पास नहीं है।

सनत सिंह ने कहा कि सीएचओ की मांगों पर शासन को निर्णय लेना चाहिए, ताकि हड़ताल समाप्त हो और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें।

 

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