छत्तीसगढ़

CG के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, आश्रितों को भी मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शासकीय कर्मचारियों एवं उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा को मंजूरी दिए जाने का शिक्षक व कर्मचारी संगठनों ने स्वागत किया है। योजना को अधिक व्यापक, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाने के लिए विस्तृत नियमावली जल्द जारी करने की मांग उठाई है।

शिक्षक साझा मंच और सर्व शिक्षक संघ व छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब इसमें पर्याप्त चिकित्सा कवर, गंभीर बीमारियों का उपचार, ओपीडी सुविधा और पेंशनरों की स्वास्थ्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान सुनिश्चित किए जाएंगे।

व्यापक चिकित्सा कवर और ओपीडी सुविधा पर जोर
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पाण्डेय ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने मांग की कि योजना में कर्मचारी के साथ पति-पत्नी, बच्चों तथा नियमानुसार आश्रित माता-पिता को शामिल किया जाए। कैंसर, हृदय रोग, किडनी की बीमारी, डायलिसिस, दुर्घटना और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पर्याप्त चिकित्सा कवर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही डॉक्टर परामर्श, दवाइयों, आवश्यक जांचों और ओपीडी उपचार को भी योजना में शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।

आपातकालीन उपचार में न हो देरी
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षकशिक्षक समग्र फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राठौर ने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में पूर्व अनुमति की औपचारिकताओं के कारण मरीज के उपचार में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में सरकारी और निजी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने तथा आवश्यकता पड़ने पर दूसरे राज्यों के अस्पतालों में भी उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

पेंशनरों को भी मिले चिकित्सा सुरक्षा का लाभ
देवेंद्र हरमुख ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों की चिकित्सा सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पेंशनरों को भी योजना में शामिल करने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए जाने चाहिए। इसके साथ ही अस्पतालों द्वारा अनुचित अतिरिक्त राशि वसूलने, कैशलेस उपचार से इनकार करने और तकनीकी समस्याओं के कारण इलाज प्रभावित होने की स्थिति में प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था होनी चाहिए।

स्पष्ट नियमावली और नियमित जांच की सुविधा जरूरी
सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद यासीर इरफान ने कहा कि योजना की पात्रता, वार्षिक चिकित्सा सीमा, गंभीर बीमारियों के कवरेज, कर्मचारी अंशदान, सूचीबद्ध अस्पतालों और उपचार की प्रक्रिया को लेकर विस्तृत नियमावली जल्द जारी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को केवल अस्पताल में भर्ती होने तक सीमित लाभ न मिले, बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, डॉक्टर परामर्श, दवाइयों, रक्त जांच, एक्स-रे, एमआरआई और अन्य आवश्यक जांचों के लिए भी प्रावधान किया जाए। इससे कर्मचारियों को योजना के वास्तविक लाभ और अपनी पात्रता की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

क्लेम अस्वीकृति पर शिकायत निवारण और प्रतिपूर्ति का विकल्प हो
नवीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने मांग की कि सूचीबद्ध अस्पताल उपलब्ध नहीं होने अथवा आपातकालीन स्थिति में कर्मचारी को इलाज के खर्च की प्रतिपूर्ति का विकल्प दिया जाए। उन्होंने कहा कि क्लेम अस्वीकृत होने, अस्पताल द्वारा अतिरिक्त राशि मांगे जाने या कैशलेस सुविधा का लाभ नहीं मिलने की स्थिति में शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि कर्मचारियों को इलाज के दौरान अनावश्यक आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर
जाकेश साहू ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा का उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को बीमारी के समय आर्थिक बोझ से राहत देना होना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपेक्षा की कि योजना के क्रियान्वयन में ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे गंभीर बीमारी या आपातकालीन उपचार के दौरान कर्मचारियों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। शिक्षक साझा मंच ने उम्मीद जताई कि शासन योजना की विस्तृत नियमावली जारी करते समय कर्मचारियों, उनके आश्रितों और पेंशनरों की जरूरतों को ध्यान में रखेगा। उनका कहना है कि स्पष्ट नियम, पर्याप्त चिकित्सा कवर, अस्पतालों की उपलब्धता और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था से ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा अपने उद्देश्य को पूरा कर सकेगी।

फेडरेशन ने जताया सरकार का आभार
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों तथा उनके परिवारों के लिए बहुप्रतीक्षित कैशलेस चिकित्सा सुविधा को कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वित्त मंत्री ओपी. चौधरी एवं स्वास्थ्य मंत्री के प्रतिआभार व्यक्त किया है। फेडरेशन ने कहा कि यह निर्णय प्रदेश के लाखों कर्मचारियों, अधिकारियों एवं उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। गंभीर बीमारी अथवा आकस्मिक चिकित्सा की स्थिति में उपचार के लिए तत्काल बड़ी धनराशि की व्यवस्था करने की चिंता कम होगी। कर्मचारी हित में लिया गया यह निर्णय चिकित्सा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने शासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शीघ्र आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि कर्मचारियों, अधिकारियों एवं पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का वास्तविक लाभ मिल सके। फेडरेशन ने यह भी उल्लेख किया कि कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर संगठन निरंतर संघर्षरत रहा है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा इन प्रमुख मांगों में शामिल थी। फेडरेशन ने इस मांग को पूरा करने की दिशा में शासन द्वारा लिए गए निर्णय को कर्मचारी संगठनों के निरंतर प्रयासों का महत्वपूर्ण परिणाम बताया।

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