मध्य प्रदेश

कटनी की पूर्व CSP नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ीं, 13 दिन से भूमिगत होने का दावा

कटनी 

 कटनी की बहुचर्चित सीएसपी जमीन सौदा प्रकरण में कार्रवाई की रफ़्तार को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। एफआईआर दर्ज हुए 13 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मामले में निलंबित पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित तीनों आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ़्त में नहीं आए हैं। सोमवार को मामले से जुड़े कुछ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज हुए, जिससे जांच को आगे बढ़ाने की उम्मीद बनी है। दूसरी ओर एएसपी जबलपुर अंजना तिवारी की अगुवाई में गठित एसआईटी की जांच और आरोपितों की तलाश की गति धीमी नजर आ रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी नेहा पच्चीसिया की अरेस्टिंग की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके लिए कई टीमें लगी हैं, उसे बार बार अपना ठिकाना बदलना पड़ रहा है। इससे नेहा पच्चीसिया का खाना पीना तक मुहाल हो गया है। केस दर्ज होने पर सीएम मोहन यादव के सख्त रुख के बाद उन्हें निलंबित किया गया था। इसके बाद से ही पूर्व सीएसपी फरार है।

मामले में सोमवार को कुछ गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज किए गए। माना जा रहा है कि इन बयानों से जमीन सौदे और प्रकरण से जुड़े घटनाक्रम की कडिय़ां जोडऩे में मदद मिल सकती है। हालांकि बयान में क्या तथ्य सामने आए, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अब कार्यालय के नए प्रभार पर नजर-
दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद माना जा रहा है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी को सीएसपी कार्यालय का प्रभार देकर इसे दोबारा विधिवत शुरू कराया जा सकता है। हालांकि मामले की जांच और कार्यालय को लेकर जिले के वरिष्ठ अधिकारी फिलहाल कुछ भी कहने से बच रहे हैं। गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज होने के बावजूद अब बड़ा सवाल यही है कि तीनों आरोपियों की अरेस्टिंग कब होगी।

13 दिन बाद भी तीनों भूमिगत
मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है। आरोप है कि हत्या के आरोपितों को डिफाल्ट बेल का लाभ दिलाने के साथ एक करोड़ से अधिक कीमत की जमीन को करीबी के नाम कम कीमत में कराने और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में उनकी भूमिका रही। एफआईआर के बाद से तीनों भूमिगत हैं। पुलिस ने अरेस्टिंग के लिए इनाम भी घोषित किया है, अब तक सफलता नहीं मिली। इस बीच अधिकारियों ने आरोपियों को जल्द पकड़ने का दावा किया है। पुलिस की कई टीमें उनके पीछे लगी हैं जिससे उन्हें बार बार ठिकाना बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दावों के उलट पुलिस अब तक तीनों को पकड़ नहीं लगा सकी है।

सीएसपी कार्यालय में फिर लगा ताला
एफआईआर दर्ज होने के बाद 21 अगस्त को सीएसपी कार्यालय सील किया गया था, ताकि प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों से छेड़छाड़ न हो। दो दिन पहले एसआईटी की टीम कार्यालय पहुंची और सील खोलकर रिकॉर्ड की जांच की। जरूरी दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कार्यालय में दोबारा ताला लगा दिया गया। दस्तावेजों से क्या अहम जानकारी मिली, इसकी जानकारी जांच एजेंसी ने सार्वजनिक नहीं की है।

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